वो पंछी ।....
आंखों में बस एक चमक है
उड़ने की,
उड़ान भर उस नील अंबर को
छूने की,
अभी तो बस पंख फैला उड़ने की
कोशिश में है वो,
अभी वो बस अपने कुनबे में से झांक-
झांक देख रहा-समझ रहा-कुछ सीख
रहा उस नील अंबर में
उड़ान भरते उस नील अंबर को
छूते अपने साथियों को,
ऐसा नहीं है कि उसने पहले कोशिश
ना की थी उड़ने की,
वो हर वक़्त उड़ने की कोशिश करता था
और अभी भी करता है पर पता नहीं क्यों ?
वो बार-बार हर बार की कोशिश के बावजूद
भी यूं धरा को ही गिर आता है,
हां हो सकता है शाय़द अभी ज़िंदगी उसके
साथ अठखेलियां कर रही हो,शाय़द उसे
उसके फड़फड़ाते पंखों को और
मज़बूत करने का समय दे रही हो ताकि जब
वो उड़े तो वो नील अंबर भी छोटा पड़ जाए,
जो आज हंसता है जब वो उड़ने की कोशिश
करते हुए यूं औंधे मुंह को धरा पर गिर आता है
दोस्त,उस पंछी को विश्वास है कि वो इक दिन
ज़रूर उड़ उस नील अंबर को छुएगा,उस नील
अंबर को छू वो अपनी आंखों में बसे सपने को
पूर्ण करेगा,- वो पंछी अपने सपने को ज़रूर पूर्ण करेगा।...
By - दीपक मौर्य.......
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